Thursday, April 22, 2010

निजरां साम्हीं हनुमानगढ़ जिलो

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1. क्षेत्रफल- 9,70,315 हैक्टेयर

2. जनसंख्या- 15,17,390

1. आदमी- 8,00,796
2. लुगाई- 7,16,594

3. शहरी जनसंख्या- 3,03,624
1. आदमी- 1,61,633
2. लुगाई- 1,41,991

4. ग्रामीण जनसंख्या- 12,13,766
1. आदमी- 6,39,163
2. लुगाई- 5,74,603

5. लिंगानुपात- 1000:891
1. ग्रामीण- 1000:878
2. शहरी- 1000:899

6. जनसंख्या री वृद्धि दर- 24.34 प्रतिशत
1. ग्रामीण- 21.80 प्रतिशत
2. शहरी- 39.33 प्रतिशत

7. रैवण जोग मकान- 1,88,904

8. तापमान-
1. गर्मियां में- 18 डिग्री सूं 48 डिग्री
2. सर्दियां में- 0 डिग्री

9. समुद्रतल सूं ऊंचाई- 183.793 मीटर

10. औसत वर्षा- 25.37 सेमी.

11. कुल खेती री जिग्यां- 9,70,315 हैक्टेयर
1. सिंचित- 4.99 लाख हैक्टेयर
2. असिंचित- 4.62 लाख हैक्टेयर

12. कुल गांव- 1906
1. आबाद- 1700
2. गैर आबाद- 206

13. उपखण्ड- 7
14. तहसील- 7
15. जिला परिषद जोन- 29
16. पंचायत समितियां- 7
17. पंचायत समिति जोन- 141
18. ग्राम पंचायत- 251
19. ग्राम पंचायत वार्ड- 2989
20. नगर अर कस्बा- 7
21. नगरपालिकावां- 7
22. कृषि उपज मंडी समितियां- 9
23. विधानसभा क्षेत्र- 7
24. औषधालय/डिस्पेंसरी- 87
25. आयुर्वेद औषधालय- 93
26. होम्योपैथी औषधालय- 4
27. यूनानी औषधालय- 1
28. प्राकृतिक औषधालय- 1
29. पशु औषधालय- 30
30. पशु उप स्वास्थ्य केन्द्र- 30
31. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र- 18
32. पंजीकृत उद्योग केन्द्र- 889

33. कुल वन क्षेत्र- 40,716 हैक्टेयर
1. आरक्षित- 38,306 हैक्टेयर
2. संरक्षित- 2,410 हैक्टेयर

34. नहरां- 2
35. नदियां- 1
36. भू-अभिलेख निरीक्षक कार्यालय- 29
37. पटवार मण्डल कार्यालय- 266
38. पुलिस थाने- 10

39. संग्रहालय- 3
1. कालीबंगा
2. संगरिया
3. रावतसर

40. पशु मेळा- 3
1. गोगामेड़ी
2. रावतसर
3. सरपालर जोहड़ (हनुमानगढ़)

41. धार्मिक मेळा- 8
1. ब्रह्माणी मेळो- पल्लू
2. भद्रकाली मेळो- अमरपुरा थेहड़ी
3. पीर बाबा रो मेळो- पीलीबंगा
4. गोगामेड़ी मेळो- गोगामेड़ी
5. रामदेव मेळो- रावतसर
6. शिला माता मेळो- हनुमानगढ़ टाऊन
7. जोड़मेळो- हनुमानगढ़ टाऊन
8. श्याम बाबा मेळो- गुरूसर

Tuesday, April 20, 2010

एक निजर हनुमानगढ़ जिलो

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हनुमानगढ़ जिलै री देखण जोग जिग्यां

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हनुमानगढ़ जिलै री देखण जोग जिग्यां

    हनुमानगढ़ मूल रूप सूं खेती करण वाळो जिलो है। कपास, कणक, चिणा, चावल, ग्वार, सब्जियां अर फसलां अठै मुख्य रूप सूं होवै है अर जिप्सम रा भी अठै मोकळा भंडार है। खेती रै सागै-सागै अठै पुराणी सभ्यता अर संस्$कति रा अवशेष इतिहासिक, धार्मिक अर सांस्कृतिक तथ्य भी मौजूद है। अठै री गंगा-जमना संस्कृति जाति-धर्म अर संप्रदाय में समरसता राखै है। इण संस्कृति रा प्रतीक अर अेतिहासिक महत्त्व री देखण जोग जिग्यां है। आओ इणां रा दरसण करां :-
   
1- कालीबंगा :- जिला मुख्यालय सूं 28 किलोमीटर दूर इण गांव रै थेहड़ री खुदाई 1961 में भारत सरकार रै पुरातत्व विभाग री ओर सूं कैई चरणां में करवाई गई। वैदिक सरस्वती नदी रै किनारै ऐ दो थेहड़ 12 मीटर ऊंचा अर आधो किलोमीटर जिग्यां में फैल्योड़ा है। अठै खुदाई में मोहनजोदड़ो नदी-घाटी सभ्यता रा अवशेष व्यवस्थित नगर रै रूप में देख्या जा सकै। अठै मकान 30x15x8 सेमी. आकार री पक्की ईंटां सूं बण्या है, कतात्मक फर्श, नाळियां, नहाणघर, देवालय, कुंआ, मृदभांड, हार, खिलौणा, मूर्तियां अर मोहरां, टूटी चूडिय़ां आद अठै संग्रहालय में अर आसै-पासै रै क्षेत्र में देखी जा सकै है। मोहरां पर अर अन्य समानां पर लिखी लिपी ब्रह्मलिपि नै सैन्धव लिपि बताई गई है, जकी आज भी पढ़ी नीं जा सकै। 

2. गोगामेड़ी :- जिला मुख्यालय सूं 115 किलोमीटर दूर स्थित है गांव गोगामेड़ी। अठै लोकदेवता गोगापीर री समाधि है। अठै हर साल श्रावण शुक्ला 15 सूं भाद्रपद शुक्ला नम्यूं तांई विशाल मेळो लागै है। उत्तरी भारत अर पशिचमी भारत सूं आयोड़ा लाखूं लोग अठै धोक लगावै है। अठै हिन्दू-मुसळमान-सिक्ख जात-पांत अर धर्म नै भूलÓर आवै है। हिन्दू-सिक्ख आं नै  ''गोगावीर" कैवै, जदकै मुसळमान आं नै ''गोगापीर" अर ''जाहरपीर" रै नांव सूं पूजै है। गोगोजी चौहान वंश रा राजपूत हा। चूरु जिलै रै ददरेवा रा शासक गोगाजी रा पिता रो नांव झाँवर अर माता रो नांव बांछल हो। अै गुरु गोरखनाथ रा शिष्य हा। गोगामेड़ी सूं थोड़ी दूर गोरखनाथ जी रो टीलो स्थित हो। ऐड़्यो मान्यो जावै कै गुरुजी रै टीलै तांई जाणै पर ही गोगामेड़ी जाणो फळदायक होवै है। लोगां रै कैयै सुण्यै अनुसार ऐ महमूद गजनवी रै विरूद्ध जुद्ध में पृथ्वीराज चौहान कानीं सूं लड़ता होया रणखेत होया।

3. भटनेर किलो :- हनुमानगढ़ टाऊन में स्थित ओ किलो देश रै प्राचीनतम किलां में आपरो स्थान ऊंचो राखै। ओ 52 बीघा जमीन में बण्योड़ो है, जिणर दीवार 90 डिग्री कोण रै प्रारूप में बणाई गई है। इण पर 52 बुर्ज अर 6 हजार 38 कंगूरा बण्योड़ा है। हरेक बुर्ज में ऐक कुंओ भी बण्योड़ा हा। इणरै साथै-साथै भटिण्डा, हिसार, सिरसा में सुरंगां भी ही, जकी इण खण्डहर अवस्था रै कारणै साम्हीं नीं आवै। किलै रै मांय हनुमानजी, करणीमाता जी, शिवजी, ठाकुर जी अर जैन मिंदर रै अलावा मकबरा अर सतियां री देवळियां हैं।

अन्य किला :- जिलै रै नोहर, भादरा, गंधेली, जसाणो, भूकरको, अजीतपुरो, फतेहगढ़ रा छोटा किला खण्डहर अवस्था में देख्या जा सकै।

4. शिला माता :- हनुमानगढ़ टाऊन बस स्टैण्ड रै कन्नै साम्प्रदायिक सद्भाव री प्रतीक शिला माता रो मिंदर है। अठै शुक्ल पख रै बिस्पतवार नै मेळो लागै है। मानता है कै अठै दूध अर नमक सूं नहावण सूं अर बिस्पतवार रै दिन फेरी लगाणै पर खाज-खुजली, कोढ़ अर मस्सा ठीक हो ज्यावै है। अठै हिन्दू-सिक्ख ''शिला माता'' रै नांव सूं अर मुसळमान ''शिला पीर'' रै नांव सूं श्रद्धा सुमन अर्पित करै है।

5. भद्रकाळी मिंदर :- ओ मिंदर जिला मुख्यालय सूं 15 किमी दूर इण मिंदर में हर साल चैत सुदी आठ्यूं अर नम्यूं नै विशाल मेळो लागै है। लोगां कन्नै सूं सुण्यै मुजब बादशाह अकबर भी अठै मां रो आशीर्वाद मांगण अर छत्र चढ़ावण आयो हो।
6. इच्छापूर्ण बालाजी मिंदर :- हनुूमानगढ़ टाऊन अर जंक्सन बिचाळै घग्घर नदी रै तट पर स्थित ओ मिंदर जन श्रद्धा रो केन्द्र बण्योड़ो है। अठै मंगळवार, शनिवार अर पूर्णिमा रै दिन मेळो लागै।

7. भट्ठेवाळा पीर :- जिला मुख्यालय सूं करीब 25 किमी दूर पीलीबंगा तहसील में भट्ठेवाळा पीर बाबा री ख्याति दूर-दूर तांई फैल्योड़ी है। इंया कैयौ जावै कै अठै भट्ठै री खुदाई में निकळी मजार सूं अचाणचक आवाज आई कै इण जिग्यां नै छोड़ दी जावै। उण रै बाद हिंदूआं अठै रिपिया लगाय'र विशाल पीरखानै री स्थापना करी।

अन्य :- मसीतांवाळी हैड, पल्ल रो ब्रह्माणी मिंदर, नोहर रो कबूतर साहब गुरूद्वारो, भभूता सिद्ध मिंदर, हनुमानगढ़ जंक्सन रो दुर्गा मिंदर, रामदेव मिंदर, टाऊन-जंक्सन री मस्जिदां, झूलेलाल मिंदर, शनि मिंदर, पीरखानो, महावीर दल मिंदर, टाऊन धान मंडी रा पांच मिंदर, सतीपुरा रो पंचमुखी हनुमान मिंदर, बींझबायला रो मावडिय़ा रो मिंदर, टाऊन रो मुख्य गुरूद्वारो अर भाई सुक्ख सिंह महताब सिंह गुरूद्वारो भी देखण जोग जिग्यां है।

Sunday, April 18, 2010

हनुमानगढ़ जिलो - एक परिचै

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हनुमानगढ़ जिलो - एक परिचै

हिमाचल प्रदेश री शिवालिक पहाडिय़ां सूं निकळ'र सगळै सारस्वत प्रदेश अर ब्रह्मावत में बैवण वाळी वैदिक नदियां, सरस्वती अर दृश्यद्धवति नदियां रो बहाव क्षेत्र रैयो हनुमानगढ़ जिलै रो इतियास आठ हजार सालां सूं भी पूराणो है। हनुमानगढ़ रै लिखित इतियास रै अभाव में ओ निश्चित नीं कर सकां कै इण री स्थापना कद हुई। ''सोळवीं सदी में राजस्थान'' रा लेखक मनोहर सिंह राणावत मुंशी देवीप्रसाद रै हवालै सूं लिखै है कै दशरथ रै बेटै भरत भटनेर किलो बणवायो अर शहर रो नांव भरतनेर राख्यो, जको कालांतर में भटनेर होग्यो।
    सन् 1801 में बीकानेर रा राजा सूरतसिंह भटनेर पर कब्जो करयो, पण 1804 में भाटियां बीकानेर राजा सूं इण नै छिण'र इण क्षेत्र में उत्त्पात मचाणो शुरू कर दियो। जिणसूं परेशान होय'र महाराजा सूरतसिंह लगै-टगै छ: मईना तांई इण किलै री घेराबंदी राखी। आखर में सन् 1805 में इण पर फतेह हासिल कर ली। उण दिन मंगळवार हो। महाराजा सूरतसिंह किलै रै अन्दर हनुमान जी रो मिन्दर बणवायो अर भटनेर रो नांव बदळ'र हनुमान जी रै नांव पर हनुमानगढ़ रख दियो। वर्तमान हनुमानगढ़ नै अतीत में घणा नांवां सूं जाण्यो गयो है अर वैदिक काल में जांगळ, सारस्वत, सारस्वत प्रदेश, सारस्वत ब्राह्मणों का बाटधान, भरतनेर, मध्यकाल में लौहगढ़, तबरहिंद, भटनेर अर हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ रै सागै-सागै अठै बैवण वाळी वैदिक नदी रो नांव भी घग्घर नदी अर स्थानीय बोलचाल री भाषा में नाळी पड़ग्यो। वर्तमान हनुमानगढ़ पूर्व में श्री गंगानगर जिलै रो एक उपखण्ड हो। प्रदेश रा तत्कालीन महामहिम राज्यपाल श्री बलिराम भगत रै कर-कमलां सूं 12 जुलाई, 1994 नै उद्घाटित होय'र हनुमानगढ़ नै प्रदेश रो 31वों जिलो बणन रो गौरव प्राप्त होयो।
   
भौगोलिक स्थिति :- हनुमानगढ़ जिलो 28.4 डिग्री सूं 30.6 डिग्री उत्तरी अक्षांश अर देशांतर 72.39 डिग्री सूं 75.30 डिग्री पूर्व मध्य में अर समुद्रतल सूं 183.793 मीटर री ऊंचाई पर स्थित है। जिलै रै पूर्व-पश्चिम में शस्य-श्यामला भूमि है। उत्तर-पूर्व रो कीं हिस्सो अर पूर्व-दक्षिण रो हिस्सो थार-मरूस्थल रै धोरां सूं आच्छादित है।,

तापमान :- हनुमानगढ़ जिलो देश रैगर्म इलाकां में आवै है। गर्मियां में अठै रो तापमान 45 डिग्री सूं भी ज्यादा चल्यो जावै है। हालाँकि सर्दियां में रातां घणी ठंडी हो ज्यावै है अर पारो शून्य तक चल्यो जावै है।

पर्यावरण :- ज्यादातर इलाको कई बरसां पैलां सूखो रेगिस्तान हो, पण आजकाल लगै-टगै सगळै जिलै में सिंचाई होवण लागी है, इण खातर हनुमानगढ़ राजस्थान रै हरये-भरये जिलां री श्रेणी में आवै है। गर्मियां में धूळ भरी आंधियां चालती रैवै अर मई-जून में लू चालै है, सर्दियां में चालण वाळी ठंडी उत्तरी हवाआं नै डांफर कैयो जावै है।

फसलां :- रबी री मुख्य फसलां हैं -चिणा, सरस्यूं, कणक, अरिंडिया अर तारामीरो। खरीफ री मुख्य फसलां में नरमो, कपास, ग्वार, मूंग, मोठ, बाजरा अर ज्वार।